वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अब AI को ‘Super Intelligence’ यानी SI के नाम से जाना जाएगा। व्हाइट हाउस में हुई एक अहम बैठक के दौरान दुनिया की प्रमुख AI और टेक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों ने तकनीक के बढ़ते जोखिमों से निपटने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए एक नैतिक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
इस बैठक में Nvidia के सीईओ जेन्सेन हुआंग, OpenAI के प्रेसिडेंट ग्रेग ब्रॉकमैन, Anthropic के सीईओ डारियो अमोडेई, Meta के सीईओ मार्क जुकरबर्ग, एलन मस्क, Amazon के संस्थापक जेफ बेजोस, Microsoft के सीईओ सत्य नडेला और Google के सीईओ सुंदर पिचाई समेत टेक जगत के कई बड़े नाम शामिल हुए।
अब Artificial Intelligence नहीं, Super Intelligence
ट्रंप ने AI का नाम बदलकर ‘Super Intelligence’ करने की घोषणा की। उनके मुताबिक, इस तकनीक की ताकत और क्षमताओं को देखते हुए इसे केवल ‘आर्टिफिशियल’ कहना उचित नहीं है। नए नाम के जरिए इन तकनीकों की क्षमताओं, संभावनाओं और तेजी से बढ़ती शक्ति को सामने रखने की बात कही गई है।
आदेश में कहा गया है कि अमेरिकी सरकार की नीति के तहत कानून की अधिकतम सीमा तक सभी सरकारी शाखाओं को ‘Artificial Intelligence’ और ‘AI’ के बजाय ‘Super Intelligence’ और ‘SI’ शब्दों का इस्तेमाल करना होगा। आधिकारिक बैठकों और अन्य सरकारी संदर्भों में पुराने नाम के इस्तेमाल को मान्यता नहीं देने की बात भी कही गई है।
चार स्तरों वाली सुरक्षा व्यवस्था पर जोर
व्हाइट हाउस की ओर से जारी ‘White House Accord on Super Intelligence: Joint Commitment on Frontier Responsibilities’ में कंपनियों के लिए सुरक्षा और ऑडिट की चार स्तरों वाली व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। इसका उद्देश्य लोगों का भरोसा बढ़ाना और उन्नत तकनीक से जुड़े संभावित खतरों की निगरानी करना है।
इसके तहत AI मॉडल की ट्रेनिंग और इस्तेमाल के दौरान साइबर सुरक्षा, जैव सुरक्षा और रासायनिक खतरों से जुड़े जोखिमों की लगातार निगरानी की जाएगी। कंपनियों को अपनी आंतरिक सुरक्षा टीम बनाने और सुरक्षा उपायों के सही तरीके से काम करने की जांच करने की जिम्मेदारी भी दी जाएगी।
इसके अलावा सुरक्षा उपायों और आंतरिक नियंत्रणों की स्वतंत्र जांच के लिए बाहरी ऑडिट कराया जाएगा। कंपनियों के निदेशक मंडल में स्वतंत्र समितियां बनाने की भी व्यवस्था रखी गई है, जो पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगी और सामने आने वाली कमियों को दूर करने पर नजर रखेंगी।
Meta के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य ग्राहकों को यह भरोसा दिलाना है कि AI सिस्टम सुरक्षित हैं और अपेक्षा के मुताबिक काम करेंगे। उन्होंने इसे पूरी इंडस्ट्री के लिए सुरक्षा मानक तय करने की दिशा में जरूरी शुरुआत बताया।
अमेरिका में AI को लेकर बढ़ी राजनीतिक बहस
यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका में AI के कारण नौकरियों पर असर, सामाजिक अस्थिरता और तकनीक के जरूरत से ज्यादा स्वायत्त होने को लेकर बहस तेज है। OpenAI और Anthropic जैसे बड़े AI डेवलपर्स भी शक्तिशाली AI मॉडल से जुड़े संभावित खतरों को लेकर चेतावनी दे चुके हैं।
नवंबर में अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होने हैं। ऐसे में दोनों प्रमुख दलों के सांसदों पर AI के कामकाज में पारदर्शिता और कड़े नियम लागू करने को लेकर दबाव बढ़ रहा है। हालांकि, अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में चुनावी व्यस्तताओं और छुट्टियों के चलते चुनाव से पहले किसी कड़े कानून के पारित होने की संभावना कम बताई गई है।
